UP में 46 आईपीएस अधिकारियों का तबादला, 18 अफसरों का प्रमोशन

उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने में पुलिस अधिकारियों का तबादला हुआ है. गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) समेत आठ जिलों के पुलिस कप्तानों को बदल दिया गया है. साथ ही लखनऊ और बरेली समेत पांच रेंज में नए डीआईजी और आईजी भेजे गए हैं. इस लिस्ट में 18 अधिकारियों को उनके पूर्व के स्थान पर प्रमोशन के साथ बरकरार रखा गया है. 46 को नई तैनाती दी गई है.

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के एसएसपी अजय पाल शर्मा को हटा कर उनके स्थान पर वैभव कृष्ण को जिम्मेदारी दी गई. अजय पाल शर्मा को पुलिस मुख्यालय प्रयागराज में कार्मिक का काम सौंपा गया है. मथुरा के एसएसपी बबलू कुमार को अब आजमगढ़ का एसपी बनाया गया है. आजगमगढ़ के एसपी रहे रवि शंकर छवि को 24वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद भेजा गया है. अलीगढ़ के एसएसपी अजय कुमार साहनी को 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ का सेनानायक बनाया गया है.

24वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक आकाश कुल्हरि को अलीगढ़ का नया एसएसपी बनाया गया है. सत्यार्थ अनिरुद्घ पंकज मथुरा के नए एसएसपी होंगे. 2013 बैच के सिद्घार्थ शंकर मीणा को हाथरस का एसपी बनाया गया है. हाथरस के एसपी जय प्रकाश का तबादला सीबीसीआईडी कर दिया गया है. पीलीभीत के एसपी बालेंदु भूषण को शासन ने हटा दिया है. उनके स्थान पर मनोज कुमार सोनकर को पीलीभीत का नया एसपी बनाया गया है. देवेंद्र नाथ को बलिया का एसपी बनाया गया है. देवेंद्र नाथ अगस्त माह में पीपीएस से प्रमोशन पाकर आईपीएस हुए थे.

इसके अलावा आईजी क्राइम एसके भगत को लखनऊ में आईजी बनाया गया है. एसआईटी के आईजी रमित शर्मा को मुरादाबाद में आईजी बनाया गया है. बरेली में राजेश पांडेय को डीआईजी बनाया गया है. मनोज तिवारी को चित्रकूट धाम रेंज के डीआईजी के पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर देवीपाटन रेंज के डीआईजी अनिल कुमार राय को भेजा गया है. 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ में तैनात राकेश सिंह को देवीपाटन रेंज का आईजी बनाया गया है.

आरोपों के समर्थन के लिए सीबीआई ने 102 गवाहों के सबूत भी पेश किए हैं. जिनमें बताया गया है कि कैसे बालिका गृह के मालिक ब्रजेश ठाकुर ने लड़कियों को खुले कपड़े पहनने, भोजपुरी गानों पर नाचने, नशा करने और मेहमानों द्वारा बलात्कार करने पर मजबूर किया. और मना करने पर उन्हें भूखा रखा. हालांकि बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में उन सरकारी अधिकारियों के नाम छोड़ दिए हैं जो इन ज़्यादतियों और उत्पीड़न के बारे में जानते थे. मगर उन्होंने ना तो उन्होंने हस्तक्षेप किया और ना कोई कार्रवाई ही की.

सीबीआई ने जिन 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायक की है, उनमें ब्रजेश ठाकुर, इंदू कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, रवि कुमार रोशन, विकास कुमार, दिलीप कुमार वर्मा, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल उर्फ गुड्डू, कृष्ण कुमार राम उर्फ कृष्णा, रोज़ी रानी, रामानुज ठाकुर उर्फ मामू, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर साहब उर्फ मास्टर जी, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमनी, विक्की, साइस्ता परवीन उर्फ मधु और डॉ.प्रमीला के नाम शामिल हैं.

इन्हीं 21 दरिंदों ने उन 34 मासूमों की ज़िंदगी नर्क बना दी. जिनका अब ज़िक्र करना भी उनके साथ नाइंसाफी होगी. लिहाज़ा सीबीआई ने पीड़ित बच्चियों के नाम सार्वजनिक ना हो इसका खास ख्याल रखा है. और इनकी पहचान को छुपाने के लिए उन्हें वी-1 यानी विक्टिम वन से वी-33 यानी विक्टिम थर्टी थ्री तक की कोडिंग के साथ पेश किया है.

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